गुरु-परम्परा
एवं परम्पराप्राप्तमिमं राजर्षयो विदुः। (भगवद्गीता ४.२) यह भगवद्गीता यथारूप इसी गुरु-परम्परा के माध्यम से प्राप्त हुई है:
१) श्रीकृष्ण, २) ब्रह्मा, ३) नारद, ४) व्यास, ५) मध्व, ६) पद्मनाभ, ७) नृहरि, ८) माधव, ९) अक्षोभ्य, १०) जय तीर्थ, ११) ज्ञानसिन्धु, १२) दयानिधि, १३) विद्यानिधि, १४) राजेन्द्र, १५) जयधर्म, १६) पुरुषोत्तम, १७) ब्रह्मण्य तीर्थ, १८) व्यास तीर्थ, १९) लक्ष्मीपति, २०) माधवेन्द्र पुरी, २१) ईश्वर पुरी, (नित्यानन्द, अद्वैत), २२) भगवान् चैतन्य, २३) रूप, (स्वरूप, सनातन), २४) रघुनाथ, जीव, २५) कृष्णदास, २६) नरोत्तम, २७) विश्वनाथ, २८) (बलदेव) जगन्नाथ, २९) भक्तिविनोद, ३०) गौरकिशोर, ३१) भक्तिसिद्धान्त सरस्वती, ३२) ॐ विष्णुपाद ए. सी. भक्तिवेदान्त स्वामी प्रभुपाद।