हि

अध्याय 1 · 4 / 39

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अत्र शूरा महेष्वासा भीमार्जुनसमा युधि ।
युयुधानो विराटश्च द्रुपदश्च महारथः ॥ ४ ॥

अत्र—यहाँ; शूराः—वीर; महेष्वासाः—पराक्रमी धनुर्धर; भीम-अर्जुन—भीम तथा अर्जुन के; समाः—समान; युधि—युद्ध में; युयुधानः—युयुधान; विराटः—विराट; च—भी; द्रुपदः—द्रुपद; च—भी; महारथः—महान् योद्धा।

इस सेना में अनेक वीर धनुर्धर हैं जो युद्ध में भीम तथा अर्जुन के समान हैं; युयुधान, विराट तथा द्रुपद जैसे महान् योद्धा भी हैं।

यद्यपि सैन्य कला में द्रोणाचार्य की अत्यन्त महान् शक्ति के समक्ष धृष्टद्युम्न कोई अति महत्त्वपूर्ण बाधा नहीं था, तथापि अन्य अनेक ऐसे थे जो भय का कारण थे। दुर्योधन उनका उल्लेख विजय के मार्ग में महान् बाधाओं के रूप में करता है, क्योंकि उनमें से प्रत्येक भीम तथा अर्जुन के समान ही दुर्जेय था। वह भीम तथा अर्जुन के बल को जानता था, और इसी कारण उसने अन्यों की तुलना उनसे की।