अध्याय 1 · 7 / 39
1.7
अस्माकं तु विशिष्टा ये तान्निबोध द्विजोत्तम ।
नायका मम सैन्यस्य संज्ञार्थ तान्ब्रवीमि ते ॥ ७ ॥
अस्माकम्—हमारे; तु—किन्तु; विशिष्टाः—विशेष रूप से शक्तिशाली; ये—जो; तान्—उन्हें; निबोध—ध्यान दीजिए, अवगत हों; द्विजोत्तम—हे ब्राह्मणश्रेष्ठ; नायकाः—सेनापति; मम—मेरी; सैन्यस्य—सेना के; संज्ञा-अर्थम्—सूचना हेतु; तान्—उन्हें; ब्रवीमि—मैं कह रहा हूँ; ते—आपको।
हे ब्राह्मणश्रेष्ठ! आपकी सूचना हेतु, मैं आपको उन सेनापतियों के विषय में बताता हूँ जो मेरी सैन्य-शक्ति का नेतृत्व करने हेतु विशेष रूप से योग्य हैं।