हि

अध्याय 1 · 8 / 39

1.8

भवान्भीष्मश्च कर्णश्च कृपश्च समितिंजयः ।
अश्वत्थामा विकर्णश्च सौमदत्तिस्तथैव च ॥ ८ ॥

भवान्—आप स्वयं; भीष्मः—पितामह भीष्म; च—भी; कर्णः—कर्ण; च—और; कृपः—कृप; च—और; समितिञ्जयः—युद्ध में सदा विजयी; अश्वत्थामा—अश्वत्थामा; विकर्णः—विकर्ण; च—तथा; सौमदत्तिः—सोमदत्त का पुत्र; तथा—और जैसे; एव—निश्चय ही; च—और।

यहाँ आप जैसी विभूतियाँ हैं—भीष्म, कर्ण, कृप, अश्वत्थामा, विकर्ण तथा सोमदत्त का पुत्र, जो भूरिश्रवा कहलाता है—जो युद्ध में सदा विजयी रहते हैं।

दुर्योधन ने युद्ध के असाधारण वीरों का उल्लेख किया, जो सब सदा-विजयी हैं। विकर्ण दुर्योधन का भाई है, अश्वत्थामा द्रोणाचार्य का पुत्र है, और सौमदत्ति अथवा भूरिश्रवा बाह्लीकों के राजा का पुत्र है। कर्ण अर्जुन का सौतेला भाई है, क्योंकि उसका जन्म राजा पाण्डु के साथ कुन्ती के विवाह से पूर्व हुआ था। कृपाचार्य ने द्रोणाचार्य की जुड़वाँ बहन से विवाह किया था।