हि

अध्याय 11 · 31 / 52

11.33

तस्मात्त्वमुत्तिष्ठ यशो लभस्व
जित्वा शत्रून्भुंक्ष्व राज्यं समृद्धम् ।
मयैवैते निहताः पूर्वमेव
निमित्तमात्रं भव सव्यसाचिन् ॥ ३३ ॥

tasmāt—अतः; tvām—तुम; uttiṣṭha—उठो; yaśaḥ—यश; labhasva—प्राप्त करो; jitvā—जीतकर; śatrūn—शत्रुओं को; bhuṅkṣva—भोग करो; rājyam—राज्य; samṛddham—समृद्ध; mayā—मेरे द्वारा; eva—निश्चय ही; ete—ये सब; nihatāḥ—पहले से मारे गए; pūrvam eva—पूर्व व्यवस्था से ही; nimitta-mātram—केवल निमित्त बनो; bhava—बनो; savyasācin—हे सव्यसाची।

अतः उठो और युद्ध हेतु तत्पर हो जाओ। अपने शत्रुओं को जीतकर तुम समृद्ध राज्य का भोग करोगे। ये मेरी व्यवस्था से पहले ही मारे जा चुके हैं, और हे सव्यसाची, तुम इस युद्ध में केवल निमित्त बन सकते हो।

सव्यसाची उसे कहते हैं जो युद्धभूमि में अत्यन्त निपुणता से बाण चला सके; इस प्रकार अर्जुन को एक ऐसे कुशल योद्धा के रूप में सम्बोधित किया गया है जो अपने शत्रुओं का वध करने हेतु बाण चलाने में समर्थ है। “केवल निमित्त बनो”: nimitta-mātram। यह शब्द भी अत्यन्त महत्त्वपूर्ण है। समूचा संसार पूर्ण पुरुषोत्तम भगवान् की योजना के अनुसार गतिमान है। पर्याप्त ज्ञान से रहित मूर्ख व्यक्ति यह सोचते हैं कि प्रकृति बिना किसी योजना के चल रही है और समस्त प्राकट्य मात्र आकस्मिक रचनाएँ हैं। ऐसे अनेक तथाकथित वैज्ञानिक हैं जो सुझाते हैं कि सम्भवतः यह ऐसा था, अथवा शायद वैसा था, किन्तु “सम्भवतः” तथा “शायद” का कोई प्रश्न ही नहीं उठता। इस भौतिक जगत् में एक विशिष्ट योजना क्रियान्वित हो रही है। यह योजना क्या है? यह विश्व-प्रकटीकरण बद्धजीवों के लिए भगवद्धाम लौटने, अपने घर लौटने का एक अवसर है। जब तक उनमें वह प्रभुत्व की मनोवृत्ति रहती है जो उन्हें भौतिक प्रकृति पर शासन करने का प्रयास कराती है, तब तक वे बद्ध रहते हैं। किन्तु जो कोई परमेश्वर की योजना को समझ सके तथा कृष्णभावनामृत का अनुशीलन करे, वह सर्वाधिक बुद्धिमान् है। विश्व-प्रकटीकरण की सृष्टि तथा संहार ईश्वर के परम मार्गदर्शन में होते हैं। इस प्रकार कुरुक्षेत्र का युद्ध ईश्वर की योजना के अनुसार लड़ा गया। अर्जुन युद्ध करने से इनकार कर रहा था, किन्तु उससे कहा गया कि उसे युद्ध करना चाहिए और साथ ही परमेश्वर की इच्छा करनी चाहिए। तब वह सुखी होगा। यदि कोई पूर्ण कृष्णभावनामृत में हो और यदि उसका जीवन उनकी दिव्य सेवा को समर्पित हो, तो वह पूर्ण है।