अध्याय 1 · 13 / 39
1.13
ततः शङ्खाश्च भेर्यश्च पणवानकगोमुखाः ।
सहसैवाभ्यहन्यन्त स शब्दस्तुमुलोऽभवत् ॥ १३ ॥
ततः—तत्पश्चात्; शङ्खाः—शंख; च—भी; भेर्यः—नगाड़े; च—और; पणव-आनक—तुरही तथा ढोल; गो-मुखाः—सींग; सहसा—सहसा; एव—निश्चय ही; अभ्यहन्यन्त—एक साथ बजाए जाने पर; सः—वह; शब्दः—संयुक्त ध्वनि; तुमुलः—तुमुल; अभवत्—हो गई।
तत्पश्चात् शंख, नगाड़े, तुरही, ढोल तथा सींग सहसा एक साथ बज उठे, और वह संयुक्त ध्वनि तुमुल थी।