अध्याय 1 · 9 / 39
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अन्ये च बहवः शूरा मदर्थे त्यक्तजीविताः ।
नानाशस्त्रप्रहरणाः सर्वे युद्धविशारदाः ॥ ९ ॥
अन्ये—अन्य अनेक; च—भी; बहवः—बड़ी संख्या में; शूराः—वीर; मद्-अर्थे—मेरे लिए; त्यक्त-जीविताः—प्राण न्योछावर करने को तत्पर; नाना—अनेक; शस्त्र—अस्त्र; प्रहरणाः—से सुसज्जित; सर्वे—वे सब; युद्ध—युद्ध; विशारदाः—सैन्य विज्ञान में निपुण।
अनेक अन्य वीर भी हैं जो मेरे लिए अपने प्राण न्योछावर करने को तत्पर हैं। वे सब विभिन्न प्रकार के अस्त्रों से भली-भाँति सुसज्जित हैं, और सभी सैन्य विज्ञान में अनुभवी हैं।
जहाँ तक अन्यों का प्रश्न है—जैसे जयद्रथ, कृतवर्मा, शल्य आदि—वे सब दुर्योधन के लिए अपने प्राण न्योछावर करने को दृढ़प्रतिज्ञ हैं। दूसरे शब्दों में, यह पहले से ही निश्चित है कि पापी दुर्योधन के पक्ष में सम्मिलित होने के कारण वे सब कुरुक्षेत्र के युद्ध में मारे जाएँगे। दुर्योधन निस्सन्देह अपने मित्रों के उपर्युक्त सम्मिलित बल के कारण अपनी विजय को लेकर आश्वस्त था।