अध्याय 10 · 20 / 40
10.22
वेदानां सामवेदोऽस्मि देवानामस्मि वासवः ।
इन्द्रियाणां मनश्चास्मि भूतानामस्मि चेतना ॥ २२ ॥
वेदानाम्—समस्त वेदों में; साम-वेदः—सामवेद; अस्मि—मैं हूँ; देवानाम्—समस्त देवताओं में; अस्मि—मैं हूँ; वासवः—स्वर्ग का राजा; इन्द्रियाणाम्—समस्त इन्द्रियों में; मनः—मन; च—भी; अस्मि—मैं हूँ; भूतानाम्—समस्त जीवों में; अस्मि—मैं हूँ; चेतना—जीवनी शक्ति।
वेदों में मैं सामवेद हूँ; देवताओं में मैं इन्द्र हूँ; इन्द्रियों में मैं मन हूँ, तथा जीवों में मैं जीवनी शक्ति [चेतना] हूँ।
भौतिक पदार्थ तथा आत्मा में अन्तर यह है कि जीव के समान भौतिक पदार्थ में चेतना नहीं होती; अतः यह चेतना परम तथा शाश्वत है। चेतना भौतिक पदार्थों के संयोग से उत्पन्न नहीं की जा सकती।