हि

अध्याय 11 · 25 / 52

11.26-27

अमी च त्वां धृतराष्ट्रस्य पुत्राः
सर्वे सहैवावनिपालसङ्घैः ।
भीष्मो द्रोणः सूतपुत्रस्तथासौ
सहास्मदीयैरपि योधमुख्यैः ॥ २६ ॥
वक्त्राणि ते त्वरमाणा विशन्ति
दंष्ट्राकरालानि भयानकानि ।
केचिद्विलग्ना दशनान्तरेषु
सन्दृश्यन्ते चूर्णितैरुत्तमाङ्गैः ॥ २७ ॥

amī—वे सब; ca—भी; tvām—आपमें; dhṛtarāṣṭasya—धृतराष्ट्र के; putrāḥ—पुत्र; sarva—समस्त; saha eva—सहित; avanipāla—योद्धा राजा; saṅghaiḥ—समूहों के साथ; bhīṣmaḥ—भीष्मदेव; droṇaḥ—द्रोणाचार्य; sūta-putraḥ—कर्ण; tathā—भी; asau—वह; saha—साथ; asmadīyaiḥ—हमारे; api—भी; yodha-mukhyaiḥ—योद्धाओं में प्रमुख; vaktrāṇi—मुखों में; te—आपके; tvaramāṇāḥ—वेग से; viśanti—प्रवेश कर रहे हैं; daṁṣṭrā—दाँत; karālāni—विकराल; bhayānakāni—अत्यन्त भयानक; kecit—उनमें से कुछ; vilagnāḥ—फँसे हुए; daśanāntareṣu—दाँतों के बीच; sandṛśyante—दिखाई दे रहे हैं; cūrṇitaiḥ—चूर्ण हुए; uttama-aṅgaiḥ—सिरों सहित।

धृतराष्ट्र के समस्त पुत्र अपने सहयोगी राजाओं सहित, तथा भीष्म, द्रोण और कर्ण एवं हमारे समस्त सैनिक आपके मुखों में वेग से प्रवेश कर रहे हैं, और उनके सिर आपके भयानक दाँतों से चूर्ण हो रहे हैं। मैं देख रहा हूँ कि कुछ आपके दाँतों के बीच भी पिस रहे हैं।

किसी पूर्व श्लोक में भगवान् ने अर्जुन को वे वस्तुएँ दिखाने का वचन दिया था जिन्हें देखने में वह अत्यन्त रुचि रखता था। अब अर्जुन देखता है कि विपक्षी दल के नायक (भीष्म, द्रोण, कर्ण तथा धृतराष्ट्र के समस्त पुत्र) तथा उनके सैनिक एवं अर्जुन के अपने सैनिक — सभी का संहार हो रहा है। यह इस बात का संकेत है कि दोनों पक्षों की भारी क्षति के उपरान्त भी अर्जुन युद्ध में विजयी होगा। यहाँ यह भी उल्लिखित है कि भीष्म, जिन्हें अजेय माना जाता है, वे भी चूर्ण किए जाएँगे। इसी प्रकार कर्ण भी। विपक्षी दल के भीष्म जैसे महान् योद्धा तो चूर्ण होंगे ही, अपितु अर्जुन के पक्ष के कुछ महान् योद्धा भी।