अध्याय 11 · 9 / 52
11.9
सञ्जय उवाच
एवमुक्त्वा ततो राजन्महायोगेश्वरो हरिः ।
दर्शयामास पार्थाय परमं रूपमैश्वरम् ॥ ९ ॥
सञ्जयः उवाच—सञ्जय ने कहा; एवम्—इस प्रकार; उक्त्वा—कहकर; ततः—तत्पश्चात्; राजन्—हे राजन्; महा-योगेश्वरः—परम शक्तिशाली योगेश्वर; हरिः—पूर्ण पुरुषोत्तम भगवान्, श्रीकृष्ण ने; दर्शयामास—दिखलाया; पार्थाय—अर्जुन को; परमम्—दिव्य; रूपम्—विश्वरूप; ऐश्वरम्—ऐश्वर्य।
सञ्जय ने कहा : हे राजन्, इस प्रकार कहकर समस्त योगशक्ति के स्वामी, पूर्ण पुरुषोत्तम भगवान् श्रीकृष्ण ने अर्जुन को अपना विश्वरूप दिखलाया।