हि

अध्याय 18 · 44 / 74

18.46

यतः प्रवृत्तिर्भूतानां येन सर्वमिदं ततम् ।
स्वकर्मणा तमभ्यर्च्य सिद्धिं विन्दति मानवः ॥ ४६ ॥

yataḥ—जिससे; pravṛttiḥ—उद्भव; bhūtānām—समस्त जीवों का; yena—जिसके द्वारा; sarvam—समस्त; idam—यह; tatam—व्याप्त है; sva-karmaṇā—अपने कर्तव्यों से; tam—उनकी; abhyarcya—आराधना करके; siddhim—सिद्धि; vindati—प्राप्त करता है; mānavaḥ—मनुष्य।

समस्त प्राणियों के स्रोत तथा सर्वव्यापी भगवान् की आराधना के द्वारा मनुष्य अपने कर्तव्य के सम्पादन में सिद्धि को प्राप्त कर सकता है।

जैसा कि पंद्रहवें अध्याय में कहा गया है, समस्त जीव परमेश्वर के अंश-स्वरूप हैं। इस प्रकार परमेश्वर समस्त जीवों के आदि हैं। इसकी पुष्टि वेदान्त-सूत्र में होती है—janmādy asya yataḥ। अतः परमेश्वर ही प्रत्येक जीव के जीवन के आदि हैं। और परमेश्वर अपनी दो शक्तियों—अपनी बहिरंगा शक्ति तथा अन्तरंगा शक्ति—से सर्वव्यापी हैं। अतएव मनुष्य को चाहिए कि वह परमेश्वर की उनकी शक्तियों सहित आराधना करे। सामान्यतः वैष्णव भक्तगण परमेश्वर की उनकी अन्तरंगा शक्ति सहित आराधना करते हैं। उनकी बहिरंगा शक्ति अन्तरंगा शक्ति का विकृत प्रतिबिम्ब है। बहिरंगा शक्ति एक पृष्ठभूमि है, किन्तु परमेश्वर अपने पूर्ण अंश परमात्मा के विस्तार द्वारा सर्वत्र स्थित हैं। वे समस्त देवताओं, समस्त मनुष्यों, समस्त पशुओं के—सर्वत्र के परमात्मा हैं। अतः मनुष्य को यह जानना चाहिए कि परमेश्वर के अंश-स्वरूप होने के कारण परम पुरुष की सेवा करना उसका कर्तव्य है। प्रत्येक को पूर्ण कृष्णभावनामृत में भगवान् की भक्ति में संलग्न होना चाहिए। इसी श्लोक में इसकी अनुशंसा की गई है।

प्रत्येक को यह सोचना चाहिए कि वह इन्द्रियों के स्वामी हृषीकेश द्वारा किसी विशेष प्रकार के व्यवसाय में लगाया गया है। और जिस कर्म में मनुष्य संलग्न है, उसके फल के द्वारा पूर्ण पुरुषोत्तम भगवान् श्रीकृष्ण की आराधना करनी चाहिए। यदि मनुष्य सदा इसी प्रकार पूर्ण कृष्णभावनामृत में सोचता रहे, तो भगवान् की कृपा से वह सब कुछ का पूर्ण रूप से जानकार बन जाता है। यही जीवन की सिद्धि है। भगवान् भगवद्गीता में कहते हैं—teṣām ahaṁ samuddhartā। परमेश्वर स्वयं ऐसे भक्त के उद्धार का भार ग्रहण कर लेते हैं। यही जीवन की सर्वोच्च सिद्धि है। मनुष्य चाहे किसी भी व्यवसाय में संलग्न क्यों न हो, यदि वह परमेश्वर की सेवा करता है, तो वह सर्वोच्च सिद्धि को प्राप्त करेगा।