हि

अध्याय 18 · 67 / 74

18.71

श्रद्धावाननसूयश्च शृणुयादपि यो नरः ।
सोऽपि मुक्तः शुभाँल्लोकान्प्राप्नुयात्पुण्यकर्मणाम् ॥ ७१ ॥

श्रद्धावान्—श्रद्धालु; अनसूयः च—तथा ईर्ष्यारहित; शृणुयात्—सुनता है; अपि—निश्चय ही; यः—जो; नरः—मनुष्य; सः अपि—वह भी; मुक्तः—मुक्त होकर; शुभान्—शुभ; लोकान्—लोकों को; प्राप्नुयात्—प्राप्त करता है; पुण्य-कर्मणाम्—पुण्यकर्मियों के।

और जो श्रद्धा से तथा ईर्ष्यारहित होकर सुनता है, वह पापमय प्रतिक्रिया से मुक्त हो जाता है और उन लोकों को प्राप्त करता है, जहाँ पुण्यात्मा निवास करते हैं।

इस अध्याय के सत्तरवें श्लोक में भगवान् ने स्पष्ट रूप से उन व्यक्तियों को गीता सुनाने का निषेध किया, जो भगवान् से ईर्ष्या करते हैं। दूसरे शब्दों में, भगवद्गीता केवल भक्तों के लिए है, किन्तु ऐसा होता है कि कभी-कभी भगवान् का कोई भक्त खुली कक्षा आयोजित करता है, और उस कक्षा में सभी विद्यार्थियों से भक्त होने की अपेक्षा नहीं की जाती। ऐसे व्यक्ति खुली कक्षा क्यों आयोजित करते हैं? यहाँ यह समझाया गया है कि यद्यपि प्रत्येक व्यक्ति भक्त नहीं होता, तथापि ऐसे अनेक मनुष्य हैं जो श्रीकृष्ण से ईर्ष्या नहीं करते। उन्हें पूर्ण पुरुषोत्तम भगवान् के रूप में उन पर श्रद्धा होती है। यदि ऐसे व्यक्ति किसी प्रामाणिक भक्त से भगवान् के विषय में सुनें, तो इसका परिणाम यह होता है कि वे तत्काल समस्त पापमय प्रतिक्रियाओं से मुक्त हो जाते हैं, और तत्पश्चात् उस लोक-व्यवस्था को प्राप्त करते हैं, जहाँ समस्त धर्मात्मा व्यक्ति स्थित हैं। अतः केवल भगवद्गीता सुनने मात्र से ही, वह व्यक्ति भी जो शुद्ध भक्त बनने का प्रयत्न नहीं करता, धर्ममय कर्मों का फल प्राप्त कर लेता है। इस प्रकार भगवान् का शुद्ध भक्त प्रत्येक व्यक्ति को समस्त पापमय प्रतिक्रियाओं से मुक्त होने तथा भगवान् का भक्त बनने का अवसर प्रदान करता है।

सामान्यतः जो पापमय प्रतिक्रिया से मुक्त होते हैं, वे धर्मात्मा होते हैं। ऐसे व्यक्ति अत्यन्त सरलता से कृष्णभावनामृत को ग्रहण कर लेते हैं। यहाँ पुण्य-कर्मणाम् शब्द अत्यन्त सार्थक है। यह महान् यज्ञ के सम्पादन की ओर संकेत करता है। जो भक्ति के सम्पादन में धर्मात्मा हैं, किन्तु शुद्ध नहीं हैं, वे ध्रुवतारा अर्थात् ध्रुवलोक की लोक-व्यवस्था को प्राप्त कर सकते हैं, जहाँ ध्रुव महाराज अध्यक्ष हैं। वे भगवान् के एक महान् भक्त हैं, और उनका एक विशेष लोक है, जिसे ध्रुवतारा कहा जाता है।