हि

अध्याय 9 · 25 / 34

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यान्ति देवव्रता देवान्पितॄन्यान्ति पितृव्रताः ।
भूतानि यान्ति भूतेज्या यान्ति मद्याजिनोऽपि माम् ॥ २५ ॥

यान्ति—प्राप्त करते हैं; देव-व्रताः—देवताओं के उपासक; देवान्—देवताओं को; पितॄन्—पितरों को; यान्ति—जाते हैं; पितृ-व्रताः—पितरों के उपासक; भूतानि—भूत-प्रेतों को; यान्ति—जाते हैं; भूतेज्याः—भूत-प्रेतों के उपासक; यान्ति—जाते हैं; मत्—मेरे; याजिनः—भक्त; अपि—भी; माम्—मुझको।

जो देवताओं की आराधना करते हैं, वे देवताओं में जन्म लेंगे; जो भूत-प्रेतों की आराधना करते हैं, वे ऐसे ही प्राणियों में जन्म लेंगे; जो पितरों की आराधना करते हैं, वे पितरों के पास जाते हैं; और जो मेरी आराधना करते हैं, वे मेरे साथ निवास करेंगे।

यदि किसी को चन्द्रमा, सूर्य या किसी अन्य लोक में जाने की इच्छा हो, तो वह उस प्रयोजन हेतु अनुशंसित विशिष्ट वैदिक सिद्धान्तों का पालन करके अभीष्ट गन्तव्य को प्राप्त कर सकता है। ये वेदों के सकाम-कर्म भाग में सजीव रूप से वर्णित हैं, जो तकनीकी रूप से दर्श-पौर्णमासी कहलाते हैं, जिनमें विभिन्न स्वर्गलोकों में स्थित देवताओं की विशिष्ट आराधना अनुशंसित है। इसी प्रकार, मनुष्य एक विशिष्ट यज्ञ करके पितृलोकों को प्राप्त कर सकता है। इसी प्रकार, मनुष्य अनेक भूत-प्रेत लोकों में जा सकता है और यक्ष, राक्षस या पिशाच बन सकता है। पिशाच-आराधना “कृष्ण कला” या “कृष्ण जादू” कहलाती है। ऐसे अनेक मनुष्य हैं जो इस कृष्ण कला का अभ्यास करते हैं, और वे सोचते हैं कि यह अध्यात्मवाद है, किन्तु ऐसी क्रियाएँ पूर्णतः भौतिकतावादी हैं। इसी प्रकार, एक शुद्ध भक्त, जो केवल पूर्ण पुरुषोत्तम भगवान् की ही आराधना करता है, नि:सन्देह वैकुण्ठ तथा कृष्णलोक के लोकों को प्राप्त करता है। इस महत्त्वपूर्ण श्लोक के माध्यम से यह समझना अत्यन्त सुगम है कि यदि केवल देवताओं की आराधना करके मनुष्य स्वर्गलोकों को प्राप्त कर सकता है, अथवा पितरों की आराधना करके पितृलोकों को, अथवा कृष्ण कला का अभ्यास करके भूत-प्रेत लोकों को, तो शुद्ध भक्त श्रीकृष्ण या विष्णु के लोक को क्यों न प्राप्त कर सके? दुर्भाग्यवश अनेक लोगों को उन उदात्त लोकों की कोई जानकारी नहीं है, जहाँ श्रीकृष्ण तथा विष्णु निवास करते हैं, और क्योंकि वे उन्हें नहीं जानते, अतः वे गिर पड़ते हैं। निर्विशेषवादी भी ब्रह्मज्योति से गिर पड़ते हैं। अतएव यह कृष्णभावनामृत आन्दोलन समस्त मानव समाज को यह उदात्त जानकारी वितरित कर रहा है कि केवल हरे कृष्ण महामन्त्र का जप करके मनुष्य इसी जीवन में पूर्ण बन सकता है और घर, भगवद्धाम लौट सकता है।